प्रतीक्षा

छिपकली की कभी तो कटी पूॅंछ सा , तो कभी ज़िंदा फन कुचले इक साॅंप सा , कुछ घड़ी को नमक में गिरी जोंक सा , कुछ पहर रेत पर नीर बिन मीन सा ; लौट कर मुझसे आने की...Read more