मुक्तक : 1062 – देखना

हो जब बेख़बर तू मैं तब देखता हूॅं ।।
तुझे रूबरू होके कब देखता हूॅं ?
मगर इतना तै है भले चुपके-छुपके ,
तुझे देखूॅं जब बाअदब देखता हूॅं ।।
-डॉ. प्रजापति प्रजापति