मुक्तक : 1066 – संग ए जफ़ा

सात तालों में इसे रख तू छिपा ,
दिल है आख़िरकार ये खो जाएगा ।।
क्यों करे इसकी अलग तैयारियाॅं ,
इश्क़ है ये ख़ुद ब ख़ुद हो जाएगा ।।
सब उठा लेगा तू सर संग ए जफ़ा ,
पड़ गया जो प्यार में बस एक दफ़्आ ,
आज जो नाक़ाबिल ए बर्दाश्त है –
वज़्न वो सब फूल सा ढो जाएगा ।।
-डॉ. हीरालाल प्रजापति