मुक्तक : 1070 – तेरे बग़ैर

जब नहीं होता तू मेरे पास तेरे नाम को ,
यों रटूॅं ज्यों जप करूॅं श्रीराम का सुग्गे सा मैं ।।
बिन तेरे वैसे तो लगती ही नहीं है भूख सच ,
और अगर कुछ खाऊॅं भी तो बस चखूॅं चुग्गे सा मैं ।।
जो न चुकता हो कभी वो क़र्ज़ बनकर रह गई ,
ज़िंदगी तेरे बग़ैर एक मर्ज़ बन कर रह गई ,
हर तरफ़ से जब उदासी घेर लेती है मुझे ,
दिल करे सिर को पटक कर फोड़ दूॅं फुग्गे सा मैं ।।
-डॉ. हीरालाल प्रजापति