मुक्तक : 1076 – क्यों ?

इससे-उससे हर किसी से बेझिझक अनथक ,
हर कहीं अपने बजाते गाल रहता था ।।
बातें बेसिर-पैर की करता था हॅंस-हॅंसकर ,
जागने से सोते तक वाचाल रहता था ।।
अब निरंतर देखता हूॅं शांत ही रहता ;
ना चले डग भर भी पर अति क्लांत ही रहता ;
क्यों निपट वासंत में वह पड़ गया पीला ,
जो विकट पतझड़ में लालम-लाल रहता था ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति