मुक्तक : 1090 – बुलबुल

मैं गाड़े जा रहा हूॅं तुम उखाड़े जा रहे !!
मैं सिल रहा हूॅं तुम उधेड़े-फाड़े जा रहे !!
बुलबुल हो तुम मगर ये आज बात क्या हुई ,
गाने की जा पे शेर से दहाड़े जा रहे ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति