मुक्तक : 1096 – झुक गया

वो सुनाई दे गया कानों को उस सुनसान में ,
जग का सन्नाटा भी मुझको शोर अब लगना अरे !!
कुछ दिखाई पड़ गया ऑंखों को मेरी उस जगह ,
अब वहाॅं इक डग मुझे भूले नहीं रखना अरे !!
बस तना सीना सिकुड़ बैठा उठा सर झुक गया ;
दौड़ता ख़ूॅं एक-इक रग़ का यक़ायक़ रुक गया ;
कुछ हुआ अंदर मेरे ऐसा कि मेरी साॅंस को ,
अब धड़कने को मेरे दिल का न दिल करना अरे !!
-डॉ. हीरालाल प्रजापति