मुक्तक: शौक़

बेशक़ मैं यह काम करूॅं रोज़ाना लेकिन ,
यह मेरा व्यवसाय नहीं , उद्योग नहीं है ।।
मैं कोशिश करता हूॅं अच्छा ही लिखने की ,
अच्छा लिख जाता तो यह संयोग नहीं है ।।
कुछ को मुझमें शायद पागलपन सा दिखता ,
सनकी सा क़िरदार उन्हें है मेरा लगता ,
मैं अपने जज़्बात बयाॅं करने का आदी ,
लिखने का बस शौक़ है मुझको रोग नहीं है ।।
-डाॅ. हीरालाल प्रजापति