पर्सनल डायरी

भले ही वो कितना भी अपना हो पर मैं ,
सुनाता नहीं अपने दुखड़े किसी को ,
न पूछो कि क्यों किंतु विस्तार से सब ,
लिखूॅं सबसे छुप पर्सनल डायरी में ।।
अगर चाहते हो मुझे पढ़के हॅंसना ,
तो छूना भी मत तुम किताबों को मेरी ;
मेरे दर्दो ग़म के बयाॅं के सिवा कुछ ,
नहीं है मेरी शेर-ओ-शायरी में ।।
-डाॅ. हीरालाल प्रजापति