मुक्तक: शौक़

बेशक़ मैं यह काम करूॅं रोज़ाना लेकिन , यह मेरा व्यवसाय नहीं , उद्योग नहीं है ।। मैं कोशिश […]

माॅं

मेरा जज़्बा मेरी माॅं के लिए सबसे जुदा है ।। है मेरे वास्ते क्या वो ; मेरे दिल पे […]

जाने क्यों ?

जाने कब से , जाने किसको , जाने क्यों मैं ढूॅंढता हूॅं ? हर कली के लब तबस्सुम को […]

दहलीज़

ख़्वाहिश में जिसकी दुनिया से उम्र भर लड़े हैं , अब भी उसी को पाने की ज़िद पे हम […]