∆ सॉनेट : 10 – राज़

होता कहीं अगर वह , बेहद न ख़ूबसूरत , होता तो प्यार उससे , इतना ज़बर न होता । होता वो दोस्त मेरा , दिलबर मगर न होता , होती भले ही मुझको , महबूब की ज़रूरत ।। पूछा जो...Read more

∆ सॉनेट : 09 – हादसा

ये मुझ सँग आजकल ज्यों हादसा ही घट रहा ; मेरा महबूब कुछ बरताव ऐसा कर रहा ।। मुझे पहचानने से बज़्म में नट-नट रहा ; जो पहलू में मेरे ख़ल्वत में शब-शब भर रहा !! नहीं था वो कभी...Read more

💝 घनाक्षरी 💝

मुझे पता तूने सच , बिछड़ मेरी याद में , नहीं रखी आँख नम , रहा सदा पर घुटा ।। तेरा मेरे दिल से जो , चिपक गया नाम तो , नहीं कभी मुझसे भी , रगड़ छुटाए छुटा ।।...Read more

∆ सॉनेट : 08 – भूल

क्या करूँं अब हो गई जो मुझसे भारी भूल ? रख सका अपने न दिल में मैं उसे आबाद ।। अब करूँ भी तो नहीं आती है उसकी याद , इस क़दर उसको भुलाने में रहा मशगूल ।। क्या हुआ...Read more

∆ सॉनेट : 07 – अनुमानित चीज़ें

अंधा हूँ छू पूँछ को रस्सी कह देता हूँ ।। पग टटोल गज के जो उनको बोलूँ खंभा ।। रबड़ी यदि बिन चक्खे लस्सी कह देता हूँ , क्यों तुझको होता है यह सब देख अचंभा ? बिन दाबे चिकना-गीला...Read more

∆ सॉनेट : 06 – क़ब्र मत ढहा

कहते हैं कि मिटने वाले की गर कभी जाए निकल – बददुआ तो करके वो रख दे सभी कुछ हाय फ़ना । सचमुच में तो क्या ख्व़ाबों में तलक अपना तू महल , बस क़ब्र पे मेरी बराए मेह्रबानी न...Read more