मादक , मसृण , मृदुल , महमहा

मादक , मसृण , मृदुल , महमहा ।। तव यौवन झूमें है लहलहा ।। जैसी कल थी तू आकर्षक । उससे और अधिक अब हर्षक । तू सुंदर , अप्सरा , परी तू । उर्वशी , रंभा से भी खरी...Read more

तिरंगा

बात करता है तिरंगे को जलाने की ।। कोशिशें करता है भारत को मिटाने की ।। ये सितारा-चाँद हरे रँग पर जड़े झण्डा , सोचता है बंद हवा में फरफराने की ।। -डॉ. हीरालाल प्रजापतिRead more

सेल्फ़ी

सब वफ़ादारी मेरी फिर आपकी , सिर्फ़ अपनापन ज़रा सा दीजिए ।। ख़ूबसूरत मैं भी हूँ मुझ पर अगर , प्यार से अपनी नज़र इक कीजिए ।। कुछ नहीं सचमुच नहीं कुछ आज बस , चाहता हूँ आप अपने हाथ...Read more

चौकीदार

उनके जिनके मंत्रियों से सीधे व्यवहार ।। करते उनमें से कई चोरी-भ्रष्टाचार ।। उस पर तुर्रा यह कि चढ़ मंचों पर बेशर्म , चिल्ला-चिल्ला बोलते हम हैं चौकीदार ।। -डॉ. हीरालाल प्रजापतिRead more

कुल्फ़ी

कभी चूसते रहे तो कभी काटते रहे ।। दाँतों से बर्फ़-टुकड़ों को बाटते रहे ।। गर्मीे में कैसे पाएँ ठंडक ये सोचकर , कुल्फ़ी को ले ज़ुबाँ पर हम चाटते रहे ।। -डॉ. हीरालाल प्रजापतिRead more

रँग डाला……..

मैंने सत्य मानों प्रेमवश , बुरी तरह तुमको रँंग डाला ।। सच बोलूँ मैं माथ शपथ धर , बुरी तरह उनको रँंग डाला ।। किंतु हाय तुम दोनों ने मिल , इक प्रतिकार की भाँति पकड़ फिर , भाँति भाँति...Read more