बलात्कारी को फांसी की सजा ठीक नहीं !!!!!!!!!!!

आधुनिक समाज में मृत्यु-दंड को बर्बर करार देते हुए दुनिया के तमाम देश इसके विरोध में हैं और कई देशों में इसे समाप्त जैसा ही माना जा सकता है एवं जिसका एक ढ़ुल-मुल तर्क यह भी रहा है कि कल को...Read more

¿? व्यंग्य : तोल मोल के बोल

बड़े -बड़े लोगों में न जाने कैसी कैसी छोटी-छोटी , गंदी-गंदी आदतें होती हैं और ग़ुस्सा तो तब आता है जब वे दूसरों को उस काम से रोकते हैं मसलन खुद तो कहाँ-कहाँ ऊँगली और खुजली करेंगे और हमसे कहेंगे...Read more

सन्डे हो या मंडे खाओ मुर्गा मछली अंडे

पौर्वात्य  शिष्टाचार कहता है कि हमें किसी व्यक्ति के खाने पीने की बुराई नहीं करना चाहिए ।  अतः सभ्य होने के नाते हमें चाहिए कि हम माँस भक्षियों के आगे मुर्गा मटन की अथवा सुरा प्रेमियों के सामने शराब की...Read more

इसे पढ़ना सख्त मना है !

क्योंकि आजकल सभी बचपन से ही ‘ जाकी ‘ के जांगिये पहनने लगे हैं ( और अब तो  पहलवान भी लंगोटी कि जगह सपोर्टर पहनकर डंड पेलते हैं ) अतः मस्तराम को मैं अपना लंगोटिया  यार नहीं बल्कि जांगिया दोस्त कहूँगा। वो मेरा  बेस्ट फ्रैंड है और अपने...Read more

■ शीर्षक में क्या धरा है ?

शीर्षक ! शीर्षक ! शीर्षक ! आख़िर क्या धरा है शीर्षक में ?अरे जनाब शीर्षक में ही तो सब कुछ धरा है। मुखड़ा ही सुन्दर न होगा तो अंतरा कौन सुनेगा ?चेहरा ही सुन्दर न होगा तो जुगराफिया कौन निहारेगा...Read more