कविता : पहचान चिह्न

इस हेतु कि हमें देखकर कोई धोखा न खा सके परम आवश्यक हैं…… ऐसे संकेत ,ऐसे प्रतीक जो अवगत करा सकें हमारे दर्शनार्थी को हमारी वास्तविकता अथवा सच्चाई से कि हम जो अंदर से भेड़िये हैं ओढ़े भले ही हैं गाय का खोल...Read more

अकविता (15) – सारे फ़साद की जड़ है फ़ुर्सत ।

     कवच      होते हैं वार से बचने को ,      मरीजों के लिए होते हैं –      डॉक्टर ,      अपराधों की रोकथाम अथवा      न्याय के लिए हैं –      पुलिस और अदालतें      बिगड़ों के लिए सुधारक      अज्ञानियों हेतु –      स्कूल और कॉलेज      यह लिस्ट और भी लंबी खींची जा सकती...Read more

अकविता (14) – सतत अनुसंधान ,शोध ,खोज ,तलाश

अभी तो हम चेतन हैं । यदि पहले से ही हमें पता हो हमारी मौत का दिन । हमें पता हो कब होने वाला है हमारा अपमान ? हम जिस परीक्षा में बैठने वाले हैं उसमें क्या पूछा जाने वाला है ?...Read more

अकविता (13) – मेरे काव्य-कर्म का मूल उद्देश्य

औरों को पता नहीं क्या ? किन्तु मेरे लिए न जाने क्यों ? किन्तु एक व्यसन है – कविता । लिख लेने के बाद मुझे असीम शांति मिलती है । इसका दूसरा कोई पाठक नहीं होता । मैं स्वयं पढ-पढ़कर आत्ममुदित होता हूँ ।...Read more

अकविता (12) -मुझे सब उल्टा लगता है

मैं वहाँ भी अरे जिसका नाम तक लेने से लोग डरते हैं हर्ष पूर्वक सदा सदा के लिए चलने को , बसने को तैयार हूँ क्या तो कहते हैं उसे ? हाँ ! नर्क । क्योंकि मैं जानता हूँ मेरा अनुभव है...Read more

अकविता (11) – उसे कितना ख़्याल है

उसे कितना ख़्याल है हमारी आँखों के स्वाद का । आज मैंने जाना । जबकि उसे देखा उजाले में , दरारों से छिपकर । वह सब जो वह लादे रहती थी निर्धन होकर भी सर्वथा नकली , सस्ते ढेरों अलंकार – जो उसके...Read more