[] नज़्म : 13 – बेवफ़ा

जो तूने बोए थे राहों में मेरी वो काॅंटे , उखाड़-उखाड़ के दरिया में आज फेंकूॅंगा ।। जो धूल ऑंखों में झोंकी थी फूॅंक-फूॅंक मेरी , वो झाड़-झाड़ के दरिया में आज फेंकूॅंगा ।। इरादतन जा ब जा सामने मेरे...Read more

[] नज़्म : 12 – क़िस्मत

खिलने से ही पहले मुरझाया ; मैं कैसा खिलने वाला हूॅं ? हर रोज़ क़तार में लग-लगकर , महॅंगे से मेरा महॅंगा सामाॅं , दूकान बढ़ाने से पहले , सब लोग ख़रीद-फरोख्त़ करें । कुछ रोज़ से मैं सामाॅं की...Read more

[] नज़्म : 11- सफ़ाई

हॅंस रहा हूॅं मैं जो ग़म से रोज़ खेला इसलिए ।। ख़ुश है वो उसने न अब तक दर्द झेला इसलिए ।। कितने लोगों से मोहब्बत के लिए हुमका ये दिल ? जिस्म का जुग़्राफ़िया कितनों का भाया ऑंख को...Read more

[] नज़्म : 10 – क्या कर रहा हूँ ?

अरे देखो मैं ये क्या कर रहा हूँ ? न टुक भी जिससे दिल को जोड़ना था , हमेशा जिससे मुँह बस मोड़ना था , जिसे तकते ही आँखें फोड़ना था , उसी उसका नज़ारा कर रहा हूँ ।। अरे...Read more

[] नज़्म : 09 – हालत

हालात ने बदल दी , सूरत मेरी कुछ ऐसी , बस साल भर पुरानी , तस्वीर को मेरी सब , तक-तक के ग़ौर से भी , कहते हैं मैं नहीं हूँ ; मैं झूठ बोलता हूँ , सच , झूठ...Read more

[] नज़्म : 08 – चाहत

है डर कि ख़ुद न बिगड़ जाऊँ साथ रह तेरे , और इतना ; फिर न सुधारे कभी सुधर पाऊँ । बुरा है तू ये ज़माने में शोर है हरसू , ये रोज़-रोज़ ही सुन-सुन के सोचता हूँ मैं ,...Read more