परिंदा

जबसे तूने कर दिया हमको नज़र अंदाज़ हम , इक परिंदा होके भूले जाऍं सच परवाज़ हम ।। जी […]

अपनी पीड़ाऍं

अपनी पीड़ाऍं किसी को मत बताना ।। शोक में तो बन विदूषक खिलखिलाना ।। लोग उड़ाते हैं हॅंसी दुखियों […]

ग़म

उससे बिछड़े यों कई साल हुए जाते थे , उससे दूरी का मगर सख़्त अभी भी ग़म था ।। […]

तालीम

हसीनों की मोहब्बत ने तुम्हें पूरा मिटाया है ।। हैं हम जो कुछ , उन्हीं की बेवफाई ने बनाया […]

क्यों ?

सच कह रहा हूॅं चाहे , मानो या तुम न मानो , पैरों पे मेरे गिरकर , रो- रो […]