■ मुक्तक : 1007 – ज़िद

                     ( चित्र Google Search से साभार ) उसके सफेद बैलों , के नाम कृष्ण और श्याम ।। कोयल का नाम बिजली , तोते का नाम संतराम ।। सुन-सुनके मुझसे आँगन...Read more

■ मुक्तक : 1006 – नवी

लोग दक़्यानूसी कहते , थे सभी जिसको , मेरी , अज़ सरापा आँख को , बिलकुल नवी लगती रही !! जाने थी किस गाँव की मैं , पूछ भी पाया नहीं , हाँ ! अदाओं से बड़े से , शह्र...Read more

■ मुक्तक : 1005 – जला डाला

इक हिमालय को सबने मिलके अपनी ताक़त से , जा से सरकाने ज़ोर-ज़ोर से हला डाला ।। सख़्त पत्थर सा बर्फ़ आफ़्ताब से मिलकर , देखते-देखते ही मोम सा गला डाला ।। सबही आए थे सोचकर गुनाह करने को ;...Read more

■ मुक्तक : 1004 – नाग

राम रटता मत हरा तोता सही , काँव करता एक काला काग रख ।। एक चितकबरी सी बिल्ली गोद ले , या भले कुत्ता कोई बेदाग़ रख ।। गाय यदि ना मिल सके तो इक सुअर ; पाल ले कैसा...Read more

■ मुक्तक : 1003 – बदल रहा हूँ मैं

नहीं कोई चिराग़ वर्ना आँधियों में क्यों , भले ही फड़फड़ा के फिर भी जल रहा हूँ मैं ? कटे नहीं है मेरे पैर तब तो काँटों पे , पहन के जूते ख़ूब तेज़ चल रहा हूँ मैं ।। मैं...Read more

■ मुक्तक : 1002 – तमन्ना

मुझको उसने न सिर्फ़ आँखों में जगह दी थी , बल्कि दिल में भी चंद रोज़ को बसाया था ।। उसको बेशक़ कभी न मेरी थी तमन्ना पर , मैंने बढ़चढ़ उसी के ख़्वाबों को सजाया था ।। हो रहा...Read more