क्यों ?

सच कह रहा हूॅं चाहे , मानो या तुम न मानो , पैरों पे मेरे गिरकर , रो- रो […]

मुक्तक: शौक़

बेशक़ मैं यह काम करूॅं रोज़ाना लेकिन , यह मेरा व्यवसाय नहीं , उद्योग नहीं है ।। मैं कोशिश […]

दहलीज़

ख़्वाहिश में जिसकी दुनिया से उम्र भर लड़े हैं , अब भी उसी को पाने की ज़िद पे हम […]