■ मुक्तक : 801 – नश्वर

कौन यह जानता नहीं कि काया नश्वर है ? सबका जीवन यहाँ पे जल का बुलबुला भर है ।। स्वप्न फिर भी वो जन्म-जन्म के सँजोता यों , जैसे अमृत की आया मटकियाँ गुटक कर है !! -डॉ. हीरालाल प्रजापतिRead more