∆ सॉनेट : 8 – भूल

क्या करूँं अब हो गई जो मुझसे भारी भूल ? रख सका अपने न दिल में मैं उसे आबाद ।। अब करूँ भी तो नहीं आती है उसकी याद , इस क़दर उसको भुलाने में रहा मशगूल ।। क्या हुआ...Read more

∆ सॉनेट : 07 – अनुमानित चीज़ें

अंधा हूँ छू पूँछ को रस्सी कह देता हूँ ।। पग टटोल गज के जो उनको बोलूँ खंभा ।। रबड़ी यदि बिन चक्खे लस्सी कह देता हूँ , क्यों तुझको होता है यह सब देख अचंभा ? बिन दाबे चिकना-गीला...Read more

∆ सॉनेट : 06 – क़ब्र मत ढहा

कहते हैं कि मिटने वाले की गर कभी जाए निकल – बददुआ तो करके वो रख दे सभी कुछ हाय फ़ना । सचमुच में तो क्या ख्व़ाबों में तलक अपना तू महल , बस क़ब्र पे मेरी बराए मेह्रबानी न...Read more

∆ सॉनेट : 05 – राज़

तुम सब लोग मुझे समझो पूरा पागल इक , तो इसमें कुछ भी न तुम्हारी यार ख़ता है । है तुमको पूरा हक़ मुझको रोज़ करो दिक़ , नाखूनों से कौन कुआँ खोदा करता है ? मुझको बेइज्ज़त करने या...Read more

∆ सॉनेट : 04 – इश्क़

आज वो मुझसे रूठ चले किस तरह बुलाऊँ ? आज मनाने से भी वो वापस आ न सकेंगे । प्यास वो उनको आज नहीं फिर क्या मैं बुझाऊँ ? पेट भरा कुछ भी जो परोसूँ खा न सकेंगे ।। सोचूँ...Read more

∆ सॉनेट : 03 – एड्स

मियाँ बताए बग़ैर चुपके गया कहाँ पर ? निगाह बीवी की उसको रो-रो तलाशती है । जहाँ भी कोई बता रहा है कि है वहाँ पर ; वहीं ज़ुबाँ से नहीं वो दिल से पुकारती है ।। यक़ीन हालाँकि करना...Read more