∆ सॉनेट : 14 – लगता था

कुछ-कुछ नहीं मुक़म्मल , नीले कमल सरीखा , कुछ देर बाद बिलकुल , ख़ूनी गुलाब जैसा , कुछ पल अमा के जलते , जुगनू के दल सरीखा , कुछ दिन बुझे चिराग़ों , में आफ़्ताब जैसा , पहले कभी-कभी कुछ...Read more

∆ सॉनेट : 13 – बारात

हर तरफ़ ये देखकर मैं हो रहा हूँ होज़ ; लड़के सेठानी से करते इश्क़ का आग़ाज़ , मर रहीं बूढ़े धनी पर लड़कियाँ हर रोज़ , मालोज़र ही क्या मोहब्बत का है अस्ली राज़ ? वो है हीरे की...Read more

∆ सॉनेट : 12 – दिल के सिर पर

दिल के सिर पे मैं अकेला बोझ ढोऊँ बेशुमार , क्यों करूँ उमीद आए कुछ न कुछ उठाए दोस्त ? वज़्ह है कि दर्द से कराहता नहीं हूँ यार ; तुम तो रोना जब भी तुमको कोई ग़म सताए दोस्त...Read more

∆ सॉनेट : 11 – उधार

जब-जब जो तू ने माँगा , मैंने दिया है तब तब , लौटा सके तो वो-वो , लौटा दे मुझको लाकर , रहता जहाँ पे मैं हूँ , उस ही जगह पे आकर , तिनका भी छोड़ना मत , देना...Read more

∆ सॉनेट : 10 – राज़

होता कहीं अगर वह , बेहद न ख़ूबसूरत , होता तो प्यार उससे , इतना ज़बर न होता । होता वो दोस्त मेरा , दिलबर मगर न होता , होती भले ही मुझको , महबूब की ज़रूरत ।। पूछा जो...Read more

∆ सॉनेट : 09 – हादसा

ये मुझ सँग आजकल ज्यों हादसा ही घट रहा ; मेरा महबूब कुछ बरताव ऐसा कर रहा ।। मुझे पहचानने से बज़्म में नट-नट रहा ; जो पहलू में मेरे ख़ल्वत में शब-शब भर रहा !! नहीं था वो कभी...Read more