● ग़ज़ल : 296 – ख़्वाहिश

न आँधी से मैं घबराऊँ , न तूफ़ाँ ही डराएँ सच !! डराएँ अब नहीं मुझको , न जाने क्यों ख़ज़ाएँ सच ? क़सम जब-जब उठाता हूँ , मैं भूलों के न करने की , कि तब-तब और भी होने...Read more

● ग़ज़ल : 295 – शराब

                वो भले ही ख़राब है तो है ; तिश्नगी ए शराब है तो है ।। चाहे काँटों से है घिरा तो क्या , मुझको लाज़िम गुलाब है तो है ।। वो चुकाए...Read more

● ग़ज़ल : 294 – बिगड़ा

पुर्ज़ा-पुर्ज़ा हो ज़मीं पर आज भी बिखरा हूँ मैं ।। तब का बिगड़ा अब तलक थोड़ा नहीं सुधरा हूँ मैं ।। मुझको धक्का देके लुढ़काया गया है इस जगह , अपनी मर्ज़ी से बुलंदी से नहीं उतरा हूँ मैं ।।...Read more

● ग़ज़ल : 293 – लू-लपट

औरों को लू-लपट मुझे तो बस नसीम था ।। लगता मुझे खजूर वो भले ही नीम था ।। आदी अगर था मैं नशे का तो मेरे लिए , गाँजा-चरस था वो शराब था अफ़ीम था ।। लगता था शक्ल से...Read more

● ग़ज़ल : 292 – आख़िरी तमन्ना

वो बेदिली से मुझको , दिल से लगे हटाने ।। मैं भी न चाह कर भी , उनको जुटा भुलाने ।। मैं साँप हौले-हौले , बनता नया-नया सा , तेज़ी से हो रहे हैं , वो नेवले पुराने ।। तैयार...Read more

● ग़ज़ल : 291 – मत ठोंक-पीट मुझको

मत ठोंक-पीट मुझको , गर हो सके तो सहला ।। अब सह न पाउँगा मैं , सच वार कोई अगला ।। उनकी नज़र में था मैं , कल तक दिमाग़ वाला , हूँ आज एक अहमक़ , बेअक़्ल और पगला...Read more