ग़ज़ल : 279 – दुश्मन

कँवल जैसा खिला चेहरा वो कब दहशतज़दा होगा ? कब उस दुश्मन के पीछे एक पड़ा वहशी ददा होगा ? हमेशा मुस्कुराता है , सदा हँसता ही रहता है , वो दिन कब आएगा मेरा अदू जब ग़मज़दा होगा ?...Read more

ग़ज़ल : 278 – हल

जकड़ कर वो मुझसे उछल कह रहे हैं ।। मेरे काटकर पैर चल कह रहे हैं ।। क़लम क्या ज़रा सी लगे थामने बस , नहीं कुछ ग़ज़ल पर ग़ज़ल कह रहे हैं ।। न जाने है क्या उसमें उसको...Read more

ग़ज़ल : 277 – औघड़दानी

चलता है सैलाब लिए मौजों की रवानी माँगे है ।। इक ऐसा दरिया है जो ख़ैरात में पानी माँगे है ।। जंगल पर जंगल कटवाने-काटने वाला हैराँ हूँ , हाथ पसारे आज ख़ुदा से रुत मस्तानी माँगे है ।। इश्क़-मोहब्बत...Read more

ग़ज़ल : 276 ( B ) – रो रहे हैं

आजकल हालात ऐसे हो रहे हैं , मस्ख़रे भी खूँ के आँसू रो रहे हैं ।। जागते रहिए ये कहने वाले प्रहरी , कुंभकरणी नींद में सब सो रहे हैं ।। लोग सच्चे , हाल बदतर देख सच का ,...Read more

ग़ज़ल : 276 – जिद्दोजहद

बड़ी जिद्दोजहद से , कशमकश से , ख़ूब मेहनत से ।। न हो हैराँ मोहब्बत की है मैंने घोर नफ़रत से ।। 1 ।। हूंँ जो आज इस मुक़ाँ पर तो बड़ी ही मुश्क़िलों से हूँ , न इत्मीनान से...Read more

ग़ज़ल : 275 – गुलबदन

काँटे न थे हमेशा से , थे इक चमन कभी ।। पत्थर से जिस्म वाले हम , थे गुलबदन कभी ।। महफ़िल में भी रहे हम आके यक़्कोतन्हा आज , जो अपने आप में थे एक अंजुमन कभी ।। चंद...Read more