9. ग़ज़ल : हर वक़्त न बनकर

हर वक़्त न बनकर राम रहो ।। मौक़ा-मौक़ा घनश्याम रहो ।। पानी भी रहो शर्बत भी रहो , कभी चाय कभी-कभी जाम रहो ।। दहलीज़ पे मंदिर-मस्जिद की , गर ख़ास रहो ; पर आम रहो ।। बरगद का गर्मी...Read more

8. ग़ज़ल : जूलियट सी हीर सी……

जूलियट सी , हीर सी , लैला के जैसी प्रेमिका ।। इस ज़माने में कहाँ पाओगे ऎसी प्रेमिका ।। क़समोंं वादों पर यक़ीं यूँ ही नहीं करती कभी , है चतुर, चालाक, ज्ञानी आजकल की प्रेमिका ।। बच नहीं सकता है अब...Read more

7. ग़ज़ल : सब तो सामान हैं

सब तो सामान हैं पिताजी के ।। कितने एहसान हैं पिताजी के ।।1।। हमपे टी-शर्ट शानदार मगर , छन्ने बनियान हैं पिताजी के ।।2।। चाहते  हैं जो वो बनूँ कैसे, खूब अरमान हैं पिताजी के ।।3।। चुप्पियाँ भी हमारी सुन लेते , दिल में दो कान हैं...Read more

6. ग़ज़ल : मुझको वो बच्ची…………..

मुझको वो बच्ची लगती है ।। सचमुच ही अच्छी लगती है ।। ख़ूब पकी है और मधुर बस , दिखने में कच्ची लगती ।। यों अंदाज़े बयाँ है उसका , झूठी भी सच्ची लगती है ।। शेरों जैसी होकर भी...Read more

5. ग़ज़ल : इक हथकड़ी

इक हथकड़ी सा काँँच का कंगन लगा मुझे ।। आज़ादियों का तोहफ़ा बंधन लगा मुझे ।।1।। इस तरह साफ़ हो रहे हैं पेड़ शह्र से , दो गमले क्या दिखे कहीं गुलशन लगा मुझे ।।2।। तनहाई दूर होगी ये आया था सोचकर , मेले में और भी अकेलापन...Read more

04 : ग़ज़ल – शराब पीना है ॥

मस्त हो आज तो ख़ुम भर , शराब पीना है ।। जाके मैख़ाने नहीं घर , शराब पीना है ।। हर किसी ग़म की दवा जाम ही अगर है तो , हमको बोतल ही उठाकर , शराब पीना है ।। दुनिया...Read more