प्रतीक्षा

छिपकली की कभी तो कटी पूॅंछ सा , तो कभी ज़िंदा फन कुचले इक साॅंप सा , कुछ घड़ी को नमक में गिरी जोंक सा , कुछ पहर रेत पर नीर बिन मीन सा ; लौट कर मुझसे आने की...Read more

मुक्तक : 1042 – क्यों ?

गंगा की धार में कुछेक मोड़-माड़कर , मुट्ठी में दाबे तैरकर बहाने को चला ।। जलती चिता में बच गए वो फाड़-फूड़कर , थैले में रख दबा-छुपा जलाने को चला ।। जाॅं से कहीं ज़ियादा जो सॅंभाल कर रखे ;...Read more

🎊 माहिया 🎊

उस वक़्त भी कब रोया ? उम्र का सब हासिल , दम भर में ही जब खोया ।। ***************** तुम रोओ महफ़िल में ; हम भी ग़म रखते , लेकिन दिल ही दिल में ।। ***************** बस जिस्म है ताक़तवर...Read more

💝 घनाक्षरी 💝

मुझे पता तूने सच , बिछड़ मेरी याद में , नहीं रखी आँख नम , रहा सदा पर घुटा ।। तेरा मेरे दिल से जो , चिपक गया नाम तो , नहीं कभी मुझसे भी , रगड़ छुटाए छुटा ।।...Read more