[] नज़्म : 06 – बिस्मिल

इंसान को बदलना , मुश्किल से भी है मुश्किल ।। इक बाज़ से मुझे तुम , तो कर रही हो हारिल ।। आकर तुम्हारी बातों , में मैं बदल रहा हूँ , हाथी हूँ बंदरों सा , लेकिन उछल रहा...Read more

[] नज़्म : 05 – डायरी

इक इशारे पे मैं उसके क्या हुआ लँगड़ा व लूला , उसने मेरे प्यार को फिर ज़िन्दगी भर ना क़बूला ? सोच में हफ़्तों-महीनों क्या मैं सालों साल से था , अपनी उस रूदादे ग़म को जो मरी होते ही...Read more

[] नज़्म : 04 – क़सम

फ़क़त इक दिन में गिन-गिनकर , कम अज़ कम दस दफ़्आ योंही , मेरे आगे न अपने हुस्न का जल्वा करो आकर !! मुझे मालूम है गर्मी का मौसम आग बरसाता , है जब नल घर में तो पनघट पे...Read more

∆ सॉनेट : 12 – दिल के सिर पर

दिल के सिर पर मैं अकेला बोझ ढोऊँ बेशुमार , क्यों करूँ उमीद आए कुछ न कुछ उठाए दोस्त ? वज़्ह है कि दर्द से कराहता नहीं हूँ यार ; तुम तो रोना जब भी तुमको कोई ग़म सताए दोस्त...Read more

■ मुक्तक : 1006 – नवी

लोग दक़्यानूसी कहते , थे सभी जिसको , मेरी , अज़ सरापा आँख को , बिलकुल नवी लगती रही !! जाने थी किस गाँव की मैं , पूछ भी पाया नहीं , हाँ ! अदाओं से बड़े से , शह्र...Read more

∆ सॉनेट : 11 – उधार

जब-जब जो तू ने माँगा , मैंने दिया है तब तब , लौटा सके तो वो-वो , लौटा दे मुझको लाकर , रहता जहाँ पे मैं हूँ , उस ही जगह पे आकर , तिनका भी छोड़ना मत , देना...Read more