दहलीज़

ख़्वाहिश में जिसकी दुनिया से उम्र भर लड़े हैं , अब भी उसी को पाने की ज़िद पे हम […]

अज़्म ( संकल्प )

जीने की ख़ातिर रोज़ मरूॅं – मैं कितनी बार , मगर मुझको , महबूब क़सम अच्छा लगता , जीना […]

इश्क़

तेरे कहने से दिन को दिन नहीं मैं रात कहता हूॅं ।। तू ख़ुश हो इसलिए तो ग़मज़दा होकर […]