[] नज़्म : 13 – बेवफ़ा

जो तूने बोए थे राहों में मेरी वो काॅंटे , उखाड़-उखाड़ के दरिया में आज फेंकूॅंगा ।। जो धूल ऑंखों में झोंकी थी फूॅंक-फूॅंक मेरी , वो झाड़-झाड़ के दरिया में आज फेंकूॅंगा ।। इरादतन जा ब जा सामने मेरे...Read more

मुक्तक : 1049 – सधी चाल

मैं लगता हूॅं यक़ीनन एक रोता खिलखिलाकर भी ।। लगूॅं डग-डग सधी ही चाल चलता लड़खड़ाकर भी ।। किसी के सख़्त ओ मज़्बूत शाने से खड़ा टिककर , नहीं गिरता मैं मैख़ाने से छककर पीके आकर भी ।। -डॉ. हीरालाल...Read more

मुक्तक : 1048 – छुप-छुप

तिरछी नज़र से उसको कब तक निहारता ? छुप-छुप दरार से भी कितना मैं ताकता ? मुझको कभी न जिसने ऑंखों में ऑंख धर- देखा तो मैं भी कब तक उसको ही चाहता ? -डॉ. हीरालाल प्रजापतिRead more

मुक्तक : 1047 – क़ुसूर

हर वक़्त ही जो दिल के पास है वो जिस्म से ,             धरती से चाॅंद जितना बल्कि और दूर है ।।               ऑंखों की मेरी सुर्ख़ियाॅं ख़राबियाॅं नहीं ,   ...Read more

मुक्तक : अश्क़बारी

हॅंसके जीने का अदाकार तो मैं हूॅं आला , पर मेरे दिल में ग़मों का गुबार पलता है ।। ख़ुद बख़ुद बज़्म में ज्यों क़हक़हे निकल जाऍं , वैसे ख़ल्वत में न टाले से रोना टलता है ।। सब ये...Read more

प्रतीक्षा

छिपकली की कभी तो कटी पूॅंछ सा , तो कभी ज़िंदा फन कुचले इक साॅंप सा , कुछ घड़ी को नमक में गिरी जोंक सा , कुछ पहर रेत पर नीर बिन मीन सा ; लौट कर मुझसे आने की...Read more