बलात्कारी को फांसी की सजा ठीक नहीं !!!!!!!!!!!

आधुनिक समाज में मृत्यु-दंड को बर्बर करार देते हुए दुनिया के तमाम देश इसके विरोध में हैं और कई देशों में इसे समाप्त जैसा ही माना जा सकता है एवं जिसका एक ढ़ुल-मुल तर्क यह भी रहा है कि कल को...Read more

8. ग़ज़ल : जूलियट सी हीर सी……

जूलियट सी , हीर सी , लैला के जैसी प्रेमिका ।। इस ज़माने में कहाँ पाओगे ऎसी प्रेमिका ।।1।। क़समोंं वादों पर यक़ीं यूँ ही नहीं करती कभी , है चतुर, चालाक, ज्ञानी आजकल की प्रेमिका ।।2।। बच नहीं सकता है अब आशिक़ बहाने से...Read more

7. ग़ज़ल : सब तो सामान हैं

सब तो सामान हैं पिताजी के ।। कितने एहसान हैं पिताजी के ।।1।। हमपे टी-शर्ट शानदार मगर , छन्ने बनियान हैं पिताजी के ।।2।। चाहते  हैं जो वो बनूँ कैसे, खूब अरमान हैं पिताजी के ।।3।। चुप्पियाँ भी हमारी सुन लेते , दिल में दो कान हैं...Read more

6. ग़ज़ल : मुझको वो बच्ची…………..

मुझको वो बच्ची लगती है ।। सचमुच ही अच्छी लगती है ।। ख़ूब पकी है और मधुर बस , दिखने में कच्ची लगती ।। यों अंदाज़े बयाँ है उसका , झूठी भी सच्ची लगती है ।। शेरों जैसी होकर भी...Read more

व्यंग्य : तोल मोल के बोल

बड़े  बड़े लोगों में न जाने कैसी कैसी छोटी छोटी गंदी गंदी आदतें होती हैं और गुस्सा तो तब आता है जब वे दूसरों को उस काम से रोकते हैं मसलन खुद तो कहाँ कहाँ ऊँगली और खुजली करेंगे और हमसे...Read more

5. ग़ज़ल : इक हथकड़ी

इक हथकड़ी सा काँँच का कंगन लगा मुझे ।। आज़ादियों का तोहफ़ा बंधन लगा मुझे ।।1।। इस तरह साफ़ हो रहे हैं पेड़ शह्र से , दो गमले क्या दिखे कहीं गुलशन लगा मुझे ।।2।। तनहाई दूर होगी ये आया था सोचकर , मेले में और भी अकेलापन...Read more