व्यंग्य : तोल मोल के बोल

बड़े  बड़े लोगों में न जाने कैसी कैसी छोटी छोटी गंदी गंदी आदतें होती हैं और गुस्सा तो तब आता है जब वे दूसरों को उस काम से रोकते हैं मसलन खुद तो कहाँ कहाँ ऊँगली और खुजली करेंगे और हमसे...Read more

5. ग़ज़ल : इक हथकड़ी

इक हथकड़ी सा काँँच का कंगन लगा मुझे ।। आज़ादियों का तोहफ़ा बंधन लगा मुझे ।।1।। इस तरह साफ़ हो रहे हैं पेड़ शह्र से , दो गमले क्या दिखे कहीं गुलशन लगा मुझे ।।2।। तनहाई दूर होगी ये आया था सोचकर , मेले में और भी अकेलापन...Read more

04 : ग़ज़ल – शराब पीना है ॥

मस्त हो आज तो ख़ुम भर , शराब पीना है ।। जाके मैख़ाने नहीं घर , शराब पीना है ।।1।। हर किसी ग़म की दवा जाम ही अगर है तो , हमको बोतल ही उठाकर , शराब पीना है ।।2।। दुनिया...Read more

3. ग़ज़ल : तेरे होते निर्जन भी

तेरे होते निर्जन भी कब निर्जन होता ।। सन्नाटों में भी भौरों सा गुंजन होता ।।1।। तू न दिखे तो सच आँखें लगतीं बेमा’नी , तू जो मिले तो मन मरुथल वृन्दावन होता ।।2।। तेरे सँग ही अपना जी भर लंच...Read more

2. ग़ज़ल : पूछ काम कितना

           पूछ काम कितना और क्या न करना पड़ता है ।।   फिर भी रूखी – सूखी से पेट भरना पड़ता है ।।1।।   फ़स्ल की कहीं कोई भी नहीं कमी लेकिन ,   अब भी कुछ...Read more

■ कहानी : एक नास्तिक की तीर्थ यात्रा

मुझे हमेशा ही अनकामन और इनक्रेडिबल बातों ने ही प्रभावित किया है। सामान्य तौर पर घटने वाली घटनाएँ मुझे चर्चा का विषय नहीं लगतीं। यानि आप सहज अनुमान लगा सकते हैं कि क्या मेरी चर्चाओं में सदैव गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड...Read more