■ कहानी : राखी की ओट में इश्क़

पता नहीं ऐसा क्या है मेरे साथ कि जिन दृश्यों से मैं बचना चाहता हूँ अचानक मेरी आँखों मेँ पड़ जाते हैं और एक बार फिर एक वर्जित दृश्य मेरी आँखों से गुजरा कि जिसे मैं जानता हूँ वह सुनसान...Read more

1. ग़ज़ल : उचकते-कूदते बंदर

उचकते-कूदते बन्दर सधी जब चाल चलते हैं ।। मेरे जंगल के  हाथी मेंढकों जैसे  उछलते हैं ।।1।। हिमालय पे भी जब राहत पसीने से नहीं मिलती , हथेली आग लेकर हम मरुस्थल को निकलते हैं ।।2।। तुम्हारे हंस बगुले जब लगाएँ लोट काजल में , मेरे कौए...Read more

■ कहानी : प्रेरणा

    वह लड़की कभी भी मेरी मोहब्बत की तलबगार न थी क्योंकि न तो मैं खूबसूरत ही था और न ही कोई अमीरजादा।एक मामूली नौकरी करने उसके शहर में आया था। मेरे मकान मालिक की इकलौती व अत्यंत खूबसूरत लाड़ली...Read more

सन्डे हो या मंडे खाओ मुर्गा मछली अंडे

पौर्वात्य  शिष्टाचार कहता है कि हमें किसी व्यक्ति के खाने पीने की बुराई नहीं करना चाहिए ।  अतः सभ्य होने के नाते हमें चाहिए कि हम माँस भक्षियों के आगे मुर्गा मटन की अथवा सुरा प्रेमियों के सामने शराब की...Read more

इसे पढ़ना सख्त मना है !

क्योंकि आजकल सभी बचपन से ही ‘ जाकी ‘ के जांगिये पहनने लगे हैं ( और अब तो  पहलवान भी लंगोटी कि जगह सपोर्टर पहनकर डंड पेलते हैं ) अतः मस्तराम को मैं अपना लंगोटिया  यार नहीं बल्कि जांगिया दोस्त कहूँगा। वो मेरा  बेस्ट फ्रैंड है और अपने...Read more

■ शीर्षक में क्या धरा है ?

शीर्षक ! शीर्षक ! शीर्षक ! आख़िर क्या धरा है शीर्षक में ?अरे जनाब शीर्षक में ही तो सब कुछ धरा है। मुखड़ा ही सुन्दर न होगा तो अंतरा कौन सुनेगा ?चेहरा ही सुन्दर न होगा तो जुगराफिया कौन निहारेगा...Read more