कविता : अगर तुझे कवि बनना है

कविता के लिए विषय ढूँढना / निशानी नहीं है / कवि होने की / कविता तो परिभाषित है / कवि कर्म रूप में / फिर क्यों इतनी परवाह विषय की / प्रेरणाओं के तत्वों की / कविता लिखने का संकल्प...Read more

23. ग़ज़ल : इस कदर नीचता नंगपन

 इस क़दर नीचता नंगपन छोड़ दो।। लूटलो सब कमजकम कफ़न छोड़ दो।। इसमें रहकर इसी की बुराई करें , ऐसे लोगों हमारा वतन छोड़ दो।। हो बियाबान के दुश्मनों रहम कुछ , यूँँ लहकते-महकते चमन छोड़ दो।। उनकी ख़ातिर जो चिथड़े लपेटे फिरें , एक दो क़ीमती पैरहन  छोड़...Read more

22 : ग़ज़ल – रहने दो सबको अपने

रहने दो सबको अपने अपने मुगालतों में ।। जो ख़्वाबों में मज़ा है , क्या है हक़ीक़तों में ?1।। नाँ चाहकर भी अच्छा , अच्छाई भूल जाये , ऐ नाज़नींं न ऐसे पेश आ तू खल्वतों में ।।2।। अच्छाई पर भी...Read more

■ मुक्तक : 13 – वस्त्रविहीनों से पूछो

( चित्र Google Search से साभार ) वस्त्र-विहीनों से पूछो सर्दी में स्वेटर का मतलब ।। फ़ुटपाथों पर रहने वालों से पूछो घर का मतलब ।। जिनको इक भी जून मयस्सर भात नहीं दो कौर रहे , उनसे पूछो घूरे की जूठन मुट्ठी भर...Read more

कविता : कसाई का बकरा बनना चाहता हूँ

झुण्ड में बकरियों के नौजवान इक बक़रा  , गोपिकाओं में सचमुच कृष्ण सा दिखाई दे ; जबकि भरे यौवन में तरसता अकेला हूँ  ; किन्तु क़सम बक़रे की लोभ नहीं मैथुन का  , मेरी नज़र में तो बस उसका कसाई...Read more

21. ग़ज़ल : जो भस्म हो चुका वो

जो भस्म हो चुका वो , लकड़ा जलेगा क्या ? मुरझा चुका जो गुल वो , फिर से खिलेगा क्या ? है पास खुद ही जिसके , तंगी-कमी वहाँ , इनकार के सिवा कुछ , माँँगे मिलेगा क्या ? हाथी पसीना अपना , छोड़े जहाँ...Read more