∆ 11. ग़ज़ल : किसी बात का कब

किसी बात का कब बुरा मानता हूँ  ।। तुझे तो मैं अपना  ख़ुदा मानता हूँ ।। मेरी कामयाबी का क्या राज़ खोलूँ , इसे तो मैं तेरी दुआ मानता हूँ ।। मेरा तू जो चाहे वो हँसकर उठाले , मेरा तो मैं...Read more

∆ ग़ज़ल : 10 – ख़ूब ठहरा

ख़ूब ठहरा बस अब तो चलने दो ।। अपने अरमान मत मसलने दो ।।1।। शम्अ की आग मुझको दे ठंडक , हूँ शरारा बशौक़ जलने दो ।।2।। सूखे , पतझड़ में काट ले जाना , फ़स्ले गुल है अभी तो फलने दो ।।3।। नर्म लफ़्ज़ों...Read more

9. ग़ज़ल : हर वक़्त न बनकर

हर वक़्त न बनकर राम रहो ।। मौक़ा-मौक़ा घनश्याम रहो ।। पानी भी रहो शर्बत भी रहो , कभी चाय कभी-कभी जाम रहो ।। दहलीज़ पे मंदिर-मस्जिद की , गर ख़ास रहो ; पर आम रहो ।। बरगद का गर्मी...Read more

बलात्कारी को फांसी की सजा ठीक नहीं !!!!!!!!!!!

आधुनिक समाज में मृत्यु-दंड को बर्बर करार देते हुए दुनिया के तमाम देश इसके विरोध में हैं और कई देशों में इसे समाप्त जैसा ही माना जा सकता है एवं जिसका एक ढ़ुल-मुल तर्क यह भी रहा है कि कल को...Read more

8. ग़ज़ल : जूलियट सी हीर सी……

जूलियट सी , हीर सी , लैला के जैसी प्रेमिका ।। इस ज़माने में कहाँ पाओगे ऎसी प्रेमिका ।। क़समोंं वादों पर यक़ीं यूँ ही नहीं करती कभी , है चतुर, चालाक, ज्ञानी आजकल की प्रेमिका ।। बच नहीं सकता है अब...Read more

7. ग़ज़ल : सब तो सामान हैं

सब तो सामान हैं पिताजी के ।। कितने एहसान हैं पिताजी के ।।1।। हमपे टी-शर्ट शानदार मगर , छन्ने बनियान हैं पिताजी के ।।2।। चाहते  हैं जो वो बनूँ कैसे, खूब अरमान हैं पिताजी के ।।3।। चुप्पियाँ भी हमारी सुन लेते , दिल में दो कान हैं...Read more