■ मुक्तक : 1 – हँस हँस के करे माफ़

हँस-हँस के करे माफ न रो-रो के सज़ा दे ॥ अब हिज़्र का ग़म मुझको तो मिलने का मज़ा दे ॥  कल चाह थी मिल जाती रे जीने से रिहाई , अब चाहूँ कि रब मुझको कभी भी न क़ज़ा दे ॥ -डॉ. हीरालाल प्रजापतिRead more

● 12 ग़ज़ल : मत वही गुजरे ज़माने

  मत वही गुज़रे ज़माने याद कर रोया करो ।। दौर जो चालू है उसके साथ में दौड़ा करो ।। अपने सीधे सादेपन को इक तरफ फेंको कहीं , होशियारी चालबाज़ी के हुनर सीखा करो ।। सच के कहने से अगर...Read more

∆ 11. ग़ज़ल : किसी बात का कब

किसी बात का कब बुरा मानता हूँ  ।। तुझे तो मैं अपना  ख़ुदा मानता हूँ ।। मेरी कामयाबी का क्या राज़ खोलूँ , इसे तो मैं तेरी दुआ मानता हूँ ।। मेरा तू जो चाहे वो हँसकर उठाले , मेरा तो मैं...Read more

∆ ग़ज़ल : 10 – ख़ूब ठहरा

ख़ूब ठहरा बस अब तो चलने दो ।। अपने अरमान मत मसलने दो ।।1।। शम्अ की आग मुझको दे ठंडक , हूँ शरारा बशौक़ जलने दो ।।2।। सूखे , पतझड़ में काट ले जाना , फ़स्ले गुल है अभी तो फलने दो ।।3।। नर्म लफ़्ज़ों...Read more

9. ग़ज़ल : हर वक़्त न बनकर

हर वक़्त न बनकर राम रहो ।। मौक़ा-मौक़ा घनश्याम रहो ।। पानी भी रहो शर्बत भी रहो , कभी चाय कभी-कभी जाम रहो ।। दहलीज़ पे मंदिर-मस्जिद की , गर ख़ास रहो ; पर आम रहो ।। बरगद का गर्मी...Read more

बलात्कारी को फांसी की सजा ठीक नहीं !!!!!!!!!!!

आधुनिक समाज में मृत्यु-दंड को बर्बर करार देते हुए दुनिया के तमाम देश इसके विरोध में हैं और कई देशों में इसे समाप्त जैसा ही माना जा सकता है एवं जिसका एक ढ़ुल-मुल तर्क यह भी रहा है कि कल को...Read more